रविदास मंदिर तोड़े जाने के बाद दलित समाज के संत वाल्मीकि मंदिर तोड़े जाने का दूसरा मामला
लखनऊ। केजीएमयू (KGMU) में दंत संकाय के पीछे स्थित भगवान वाल्मीकि के प्राचीन मंदिर को मंगलवार रात ध्वस्त कर दिया गया। सुबह इसकी जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंचे वाल्मीकि समाज के सैकड़ों लोगों हंगामा शुरू कर दिया और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ चौक कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई। मौके पर तनाव को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। मंदिर के एक श्रद्धालु ने बताया कि 17 अक्तूबर को वाल्मीकि जयंती प्रकट दिवस की तैयारी चल रही थी, इसी बीच विवि प्रशासन ने रातों-रात मंदिर ध्वस्त कराकर भगवान वाल्मीकि की प्रतिमा, धार्मिक पुस्तकें, पूजन सामग्री आदि गायब करा दी। मंदिर जाने का मार्ग भी गेट लगाकर बंद कर दिया गया।
केजीएमयू के चीफ प्राक्टर ने मंदिर गिराए जाने की किसी पूर्व सूचना से इन्कार करते हुए चौक पुलिस को मामले की जांच करने व प्रकरण में संलिप्त लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के लिए तहरीर दी है। साथ ही मंदिर का निर्माण कार्य शुरू कराने का आश्वासन दिया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि करीब एक सप्ताह पहले दंत संकाय के पीछे की जमीन को समतल कराया गया था। वहां पार्किंग स्टैंड बनाने की तैयारी की जा रही है। इसी बीच ठेकेदार ने बिना किसी सूचना के मंदिर तोड़ डाला। इससे पूर्व अखिल भारतीय वाल्मीकि महासभा के राष्ट्रीय महासचिव श्यामलाल वाल्मीकि ने बताया कि मंदिर में करीब 90 साल से पूजा-अर्चना व जयंती समेत अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा था।
संबंधित घटना पर बसपा प्रमुख मायावती ने ट्विट कर सरकार को घेरा है। दिल्ली के संत रविदास आश्रम का जिक्र करते हुए वाल्मीकि मंदिर गिराने का विरोध किया है।