हिंदी को राष्ट्रीय भाषा घोषित करने के ये होंगे लाभ और हानियां!

हर वर्ष 14 सितंबर को आखिर क्यों मनाया जाता है हिंदी दिवस, पढ़े..


1. हिंदी भाषा का इतिहास बहुत पुराना नहीं है. हिंदी की खड़ी बोली का जनक भारतेंदु हरिश्चंद्र को कहा जाता है लेकिन पहली बार सही मायनों में खड़ी बोली का इस्तेमाल अमीर खुसरों की रचनाओं में देखने को मिलता है. अमीर खुसरो ने हिंदी को अपनी मातृभाषा कहा था.



2. मुगलों के शासनकाल के दौरान भी हिंदी का खूब प्रचार - प्रसार हुआ. इसके अलावा संत सम्प्रदायों का भी हिंदी के प्रचार - प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान रहा. उन्होंने इसे जन मानस की भाषा समझते हुए अपनी रचनाएं और व्याख्यान हिंदी में दिया.



3. बात 1918 की है. तब हिंदी साहित्य सम्मलेन की अध्यक्षता करते हुए महात्मा गांधी ने कहा था कि हिंदी ही देश की राष्ट्रभाषा होनी चाहिए. लेकिन आजादी के बाद ना गांधीजी रहे ना उनका सपना. सत्ता में बैठे और भाषा-जाति के नाम पर राजनीति करने वाले लोगों ने हिन्दी को राष्ट्रभाषा नहीं बनने दिया.



4. आजादी मिलने के भारत गणतंत्र की आधिकारिक भाषा के चुनाव का चुनाव काफी अहम हो गया था. भारत में सैकड़ों भाषाएं बोली जाती थीं, जिनमें से किसी एक भाषा का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा था. काफी सोच - विचार के बाद 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा देवनागरी लिपि में लिखी गई हिंदी को राज्य की राजभाषा के रूप में मान्यता मिली. इसे संविधान के अनुच्छेद 343 (1) के तहत मान्यता प्रदान की गई. ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि उस समय हिंदी उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों में बोली और समझी जाती थी. यह भारत का सबसे ज्यादा आबादी वाला हिस्सा था. इसके साथ ही संविधान के अनुच्छेद 343 (2) के तहत ये भी प्रावधान किया गया कि 
संविधान लागू होने के 15 सालों तक सरकारी कार्यों में अंग्रेजी का प्रयोग पहले की तरह ही होता रहेगा. ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि उसके पहले अंग्रेजी हुकूमत के दौरान सारा कार्य अंग्रेजी में ही होता था इसलिए लोगों को अंग्रेजी से ज्यादा दिक्कत नहीं होनी थी. ऐसा करने के पीछे एक कारण ये भी था कि इस दौरान हिंदी का खूब प्रचार - प्रसार किया जाएगा और हिंदी न जानने वाले हिंदी सीख जाएंगे. फिर सारा काम हिंदी में होने लगेगा. लेकिन तब तक हिंदी दिवस नाम का कोई विचार अस्तित्व में नहीं आया था. साल 1953 में वर्धा स्थित राष्ट्रभाषा प्रचार समिति ने 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाए जाने का सुझाव दिया. जिसे सरकार द्वारा मान लिया गया और तभी से हिंदी दिवस मनाने की शुरुआत हुई. आज देश का संविधान लागू हुए 72 साल हो गए हैं लेकिन इसके बावजूद आज तक हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं मिल पाया और न ही हिंदी पूरे देश के जन समान्य की भाषा बन पाई. इसका प्रमुख कारण है दक्षिण भारतीय राज्यों का विरोध है जिनका मानना है कि हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिए जाने और सारे सरकारी काम काज हिंदी में होने पर उनकी स्थानीय भाषाई संस्कृति खतरे में आ जाएगी.



5. दक्षिण भारत में हिंदी का प्रचार - प्रसार करने के उद्देश्य से साल 1918 में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा की शुरुआत की गई. महात्मा गांधी और एनी बेसेंट इसके संस्थापक सदस्य थे. साल 1964 में संसद द्वारा एक अधिनियम पारित करके इसे राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित कर दिया गया. दक्षिण भारत में इसके चार क्षेत्रीय मुख्यालय हैं, जो नियमित तौर पर संगोष्ठियों, कार्यशालाओं, कवि सम्मेलनों जैसे कार्यक्रम आयोजित करा कर हिंदी के विकास में मदद कर रही है. दक्षिण भारत के राज्य मुख्यतः तमिलनाडु और केरल हिंदी को राष्ट्रभाषा बनने इसके अलावा बॉलीवुड फिल्में भी दक्षिण भारत में हिंदी का प्रचार हो रहा है. लोग हिंदी समझने लगे हैं. उत्तर के लोगों का दक्षिण और दक्षिण के लोगों का उत्तर भारत में  बढ़ता अवागमन भी हिंदी के प्रचार - प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है.



6. इसके अलावा विदेशों में भी हिंदी का अस्तित्व बढ़ रहा है. अमेरिका, इंग्लैंड, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भारतीयों के बढ़ते प्रवास के कारण वहां भी हिंदी बोलने वालों की संख्या में संतोषजनक वृद्धि हो रही है. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब अमरीका गए थे तो उन्होंने भारतवंशियों के संबोधित करते हुए हिंदी में भाषण दिया था जिसे भारतीयों के साथ - साथ अमरीकियों ने भी सुना और समझा. संयुक्त राज्य अमेरिका सरकार ने हिंदी भाषी लोगों की बड़ी संख्या को देखते हुए @Usahindimein नाम से एक आधिकारिक ट्विटर हैंडल शुरू किया. जिसके माध्यम से विभिन्न मुद्दों पर सरकार द्वारा अपनी स्थिति व्यक्त किया जाता है. इसके अलावा भारत सरकार हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा बनाये जाने के लिए काफी समय से प्रयासरत है. अभी इस बास्केट में 6 भाषाएं अरबी, चाइनीज, अंग्रेजी, फ्रेंच, रूसी और स्पेनिश शामिल हैं. इस बास्केट में शामिल होने पर संयुक्त राष्ट्र का सारा कामकाज इन 6 भाषाओं के साथ - साथ हिंदी में भी होने लगेगा. हालांकि अभी तक हमें इसमें सफलता तो नहीं मिली है लेकिन पिछले साल जुलाई में संयुक्त राष्ट्र ने @UNinHindi नाम से एक आधिकारिक ट्विटर हैंडल जारी किया, जहां पर संयुक्त राष्ट्र से संबंधित नवीन जानकारियां मिलती रहती हैं. संयुक्त राष्ट्र का यह कदम निश्चित तौर पर हमारा उत्साहवर्धन करता है और हमें ये विश्वास दिलाता है कि हिंदी का भविष्य उज्ज्वल है.



7. हिंदी को बढ़ाने में आज कंप्यूटर और इंटरनेट का भी बहुत योगदान है. लोग सोशल मीडिया पर हिंदी में मैसेज फॉरवर्ड कर और पढ़ भी रहे हैं. इसके अलावा तमाम वेबसाइट्स भी हिंदी में बन रही हैं. जो विभिन्न तरह के कंटेंट देवनागरी लिपि में उपलब्ध कराती हैं. इसके अलावा दूर देशों में बैठे गैर हिंदी भाषी लोग भी इंटरनेट की मदद से हिंदी सीख और समझ रहे हैं.



8. हालांकि सिर्फ कहने भर से हिंदी का अस्तित्व बचा नहीं रहेगा. जिस तेजी से भारत में अंग्रेजी का प्रचलन बढ़ रहा है और अंग्रेजी नई पीढ़ी को अपनी गिरफ्त में ले रही है उससे हिंदी के भविष्य के प्रति संदेह भी होता है. आज हिंदी बची है, आगे भी बची रहेगी लेकिन ये तभी सम्भव होगा जब हम खुद को अपने बच्चों को और उनके साथ - साथ आने वाली पीढ़ी को हिंदी के प्रयोग के लिए प्रेरित कर सकें. बच्चों को हिंदी सिर्फ एक विषय के रूप में नहीं पढ़ानी चाहिये बल्कि हिंदी उनके दिल से निकलने वाली पहले भाषा होनी चाहिए और अगर हम ऐसा न कर सके तो शायद हमारे बाद की पीढियों के लिए हिंदी लुप्तप्राय भाषा और देवनागरी लुप्तप्राय लिपि बन जाए.



9. आखिर में सबसे महत्वपूर्ण बात. किसी भी चीज के विस्तार के लिए उसका लचीला होना बहुत जरूरी है. यही भाषा के साथ भी लागू होता है. जो भाषा जितनी लचीली होगी उतनी तेजी से उसका विस्तार होगा. हमारी हिंदी भी बहुत लचीली है. भाषा के लचीलेपन से नए शब्द उसमें शामिल होंगे और उसका शब्द भंडार बढ़ेगा. लेकिन कुछ भाषाविद शुद्ध संस्कृतनिष्ठ और परिष्कृत हिंदी के प्रयोग पर जोर देते हैं. उनका मानना है कि व्याकरण के बिना भाषा का कोई मतलब नहीं होता. यहां एक बात मैं क्लियर कर देना चाहता हूं कि लेखन के लिए व्याकरण जरूरी है लेकिन बोलचाल के लिए उसी तरह के शब्दों का प्रयोग करना चाहिए जो जनसामान्य को समझ आये. ऐसा होने पर हिंदी का अस्तित्व बचा रहेगा नहीं तो इसकी भी वही गति होगी तो बाकी की प्राचीन भाषाओं की हुई है।